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Hello!

I Pardeep Kumar

Travel Writer, Academician, Photographer & Bloggerयात्रा और परिवहन

मुख्यतः मैं एक मीडिया शिक्षक हूँ, लेकिन हमेशा कुछ नया और रचनात्मक करने की फ़िराक में रहता हूं। मेरा मानना है अगर आप किसी भी काम को मन लगा कर करेंगे तो देर-सवेर उसमें आपको कामयाबी अवश्य मिल जाएगी। फुल टाइम ट्रैवलर नहीं हूं लेकिन घूमने-फिरने का बेहद शौक़ीन हूं, इसलिए जब भी थोड़ा-सा मौका मिलता है किसी नई  यात्रा पर निकल पड़ता हूं और जब मौका नहीं मिलता तब मौके बनाने की जुगत में रहता हूँ। कविताएं, पेंटिंग करना और पढ़ना-लिखना बेहद पसंद है। जब मैं कुछ नहीं कर रहा होता हूं तब शायद बहुत कुछ कर रहा होता हूं, क्योंकि मेरा खाली समय कुछ नई योजनाएं बनाने में और उनके इम्प्लीमेंटेशन के बारे में सोचने में गुजरता है।

- Pardeep Kumar

मुझे लगता है ख्याल बुनना(थॉट्स ) बड़ा साहसिक और रचनात्मक काम है क्योंकि बहुत बार यही ख्याल आपके भविष्य की दशा और दिशा तय करते हैं। किसी भी चीज को लेकर मेरे फंडे बहुत स्पष्ट हैं। सच कहूँ तो ज़िंदगी में लचीलापन(फ्लेक्सिबिलिटी) बहुत है और शायद यही लचीलापन कुछ नया करने को प्रेरित करता है। ज़िंदगी में जोखिम लेना पसंद है, हमेशा से मेरी यही धारणा रही है कि जोखिम नहीं तो कुछ नया भी नहीं। सफलता-असफलता बहुत बाद की बात है। अगर मैं अपने आपको एक ट्रैवलर के तौर पर देखूं तो मुझे स्काई डाइविंग और जंपिंग में इतना आनंद नहीं आता जितना पहाड़ों पर चढ़ने-उतरने और किसी नदी या झरने के किनारे बैठकर चाय पीते हुए प्रकृति को निहारने में मजा आता है और चाय पीने की इस तमाम प्रक्रिया में रूह को जो सुकून मिलता है उसको यहाँ लिख पाना शायद मुमकिन नहीं।
मुझे लगता है हर यात्रा में अनेक अंतहीन यात्रायें होती हैं जो लगातार मेरे भीतर चलती रहती हैं। भले ही शरीर विश्राम में हो पर मन कभी ज़िंदगी की उधेड़बुन को समझता दार्शनिक, कभी पुराने क़िलों में नया जीवन खोजता इतिहासकार तो कभी पहाड़ों के भूगोल का ज्ञाता बनने के प्रयास में हमेशा गतिमान ही रहता है।

 

नई-नई जगह देखना, घूमना, नए-पारम्परिक व्यंजनों का लुत्फ़ उठाना, नए लोगों से उनके रहन-सहन, उनके कल्चर और परिवेश के विषय में जानने हेतू संवाद स्थापित करना और खूब सारी फोटोग्राफी करना मुझे बेहद भाता है। लम्बे सफर पर चलते-चलते बीच राह किसी ढ़ाबे पर कड़क चाय पीने की तलब हमेशा मुझे ज़िंदा बनाये रखती है।

 

मेरा मानना है चाहे वो कोई हिल स्टेशन हो या मैदानी इलाके में स्थित कोई पुराना शहर, हर जगह के अपने कई कैरेक्टर होते हैं जिन पर आप कितनी ही स्क्रिप्ट लिख लो, कहानी बुन लो या कोई फिल्म बना लो। जितना पुराना शहर उतना ही उस की गलियां, चौक चौराहे, नुक्कड़ अपने आप दिल में उतरते जाते हैं। इन शहरों का हर कोना, छज्जा, मुंडेर या कोई दीवार अपने आप में इतिहास की न जाने कितनी कहानियां समेटे हुए हैं, जो अपने परम्परागत संस्कारों और अपनी अद्वितीय बनावट से आज भी हमारी जिंदगियों पर असर डालते हैं। देखा जाए तो यात्रा सभी करते हैं पर किसी भी यात्रा पर लिखने के लिए उस यात्रा को एक हद तक जीना पड़ता है। मैंने अपनी बहुत-सी यात्रायें अकेले की हैं और मित्रों-सम्बन्धियों के साथ भी और काफी यात्रायें अपने प्रिय विद्यार्थियों के साथ भी। और सभी  यात्राओं का खूब आनंद भी लिया है। जब आप जिंदगी की भागम-भाग से उकता जाते हो, रूटीन वर्किंग लाइफ से थक जाते हो तब स्वतः ही आपके कदम किसी यात्रा पर निकलने के लिए मचल पड़ते हैं।
फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रेवल ब्लॉग में मैंने अपनी ऐसी ही यात्राओं के बारे में अपने अनुभव शेयर किये हैं जिनमें आप देश भर की ऐसी जानी-पहचानी, गुमनाम जगहों, खानपान, लाइफस्टाइल, बाजार और कल्चर से अवगत हो सकेंगे।

प्रदीप कुमार

Founder & Director, Five Colors of Travel

Ph.D. Mass Communication