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उत्तराखंड की फ्लावर वैली, इतनी खूबसूरत जैसे कोई जादुई सपना हो

क्या आपने कभी किसी ऐसी जगह घूमने जाने का सपना सजाया है जहां दूर-दूर तक पहाड़ियां हो, चारों ओर फूल के बगीचे हो और जहां खूबसूरत रंग-बिरंगे फूल खिले हुए हो? अपनी आंखों को बंद करके सोचिए कि कितनी खूबसूरत होगी वह जगह, जहां यह सब सच होगा? अपने ख्यालों से पूछिए कि उस जगह की फिजाओं में घुली हुई फूलों की खुशबू कितनी खूबसूरत होगी?.. और फिर अपने दिल से पूछिए कि क्या आप उस जगह से वापस लौट कर आना चाहेंगे या वहीं का हो कर रह जाना चाहेंगे? (फ्लावर वैली)

यह सब पढ़ कर आपके मन में ख्याल आ रहा होगा कि मैं ऐसा क्यों सोचूं? वैसी जगह तो एक्जिस्ट ही नहीं करती है! लेकिन यह जगह सच में एक्जिस्ट करती है और वह भी भारत में। यह जगह है उत्तराखंड की फ्लावर वैली!
आज के इस ब्लॉग में हम आपको इस खूबसूरत सी जगह के बारे में बताने वाले हैं। तो आईए जानते हैं

फ्लावर वैली उत्तराखंड में एक ऐसी जगह है जहां आपको चारों ओर हजारों प्रकार के फूलों, पौधों और छोटे-छोटे जीव जंतुओं को देखने का अवसर मिलेगा। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि इस शब्दों में बयां किया जा सकना नामुमकिन है। इस जगह की खूबसूरती को महसूस करने के लिए और यहां के फिजाओं में बसे सुकून के एहसास को समझने के लिए आपको खुद ही यहां तक आना पड़ेगा। नेचर्स लवर के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि आप इसे तस्वीरों में कैद करने से खुद को रोक नहीं पाएंगे। इस जगह के बारे में आपको एक और खास बात यह है कि ये जगह वर्ल्ड हेरिटेज साइट के सूची में शामिल है। वर्ष 2005 में इस यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट में स्थान मिला था।

उत्तराखंड की फ्लावर वैली

बद्रीनाथ से 25 किलोमीटर पहले एक जगह पड़ता है, जिसका नाम है गोविंद घाट। जहां अलकनंदा और लक्ष्मण गंगा का संगम होता है। गोविंद घाट से आपको फूलों की घाटी जाने के लिए पहले आपको पुलना गांव जाना होगा। पुलना गांव जाने के लिए आप शेयरिंग टैक्सी भी ले सकते हैं। पुलना पहुंचने के बाद आपको घांघरिया के लिए पैदल ट्रैकिंग करना होगा।
लेकिन घांघरिया के लिए निकलने से पहले आप पुलना में ही रुक कर वैली ऑफ फ्लावर के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवा ले। रजिस्ट्रेशन के बाद आप घांघरिया के लिए निकल सकते हैं।
अगर आप अपने बाइक या फिर कार से आ रहे हैं तो पुलना में आपको छोटे-छोटे होमस्टे, ढाबे और मोटरसाइकिल या कार की पार्किंग मिल जाएगी। पुलना से घांघरिया लगभग 10 किलोमीटर दूर है और इसकी चढ़ाई आपको पैदल ही करनी होगी।

थकान तो बहुत होगा, लेकिन यकीन मानिए इस ट्रैकिंग के रास्ते में आने वाले खूबसूरत नजारे देख कर आप खुद को आगे बढ़ने से रोक नहीं पाएंगे। ये रास्ते इतनी खूबसूरत होते हैं कि आपको पहले से ही एक्साइटमेंट होने लगेगी कि अगर रास्ता इतना खूबसूरत है तो मंजिल कितना खूबसूरत होगा? और यकीन मानिए, जब आप फूलों की घाटी तक पहुंचेंगे तो आपको लगेगा कि आप किसी जन्नत में उतर आए हैं। घांघरिया के रास्ते में आपको सबसे पहले जंगल चट्टी नाम का एक बाजार मिलेगा। जो एक बहुत ही छोटा सा बाजार है। जिसके बाद फिर जब आप आगे बढ़ेंगे तो आपको भ्युवदार गांव से गुजरना होगा। यह गांव इस ट्रैक का एक इंपॉर्टेंट पॉइंट माना जाता है। जहां आपको कई सारे ढाबे देखने को मिल जाएंगे। आप यहां कुछ देर रुक कर लंच कर सकते हैं और थोड़ा रेस्ट कर सकते हैं। इस गांव को क्रॉस करते हुए हीं आप लक्ष्मण गंगा को पार करेंगे।

उत्तराखंड की फ्लावर वैली

पुलना से भ्युवदार गांव के रास्ते में आपको पानी लेकर चलने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। क्योंकि इस रास्ते में जगह-जगह मिनरल वाटर के नल लगाए गए हैं। जहां से आप पानी पी सकते हैं। लेकिन भ्युवदार गाँव से आगे आपको सीधा घांघरिया पहुंचने पर ही पानी मिलेगा। इसीलिए आप घांघरिया के लिए निकलने से पहले आप अपने साथ पानी का बोतल रख ले।

घांघरिया से वैली ऑफ फ्लावर का रास्ता लगभग 4 किलोमीटर का है और सुबह के 7:00 बजे से दोपहर के 12:00 बजे के तक हीं यहां से आगे की ट्रैकिंग के लिए रास्ता खुला होता है। 12:00 बजे के बाद घांघरिया से फ्लावर वैली के लिए आपको ट्रैकिंग करने नहीं दिया जाएगा। इसीलिए आपको घांघरिया पहुंचकर उस दिन वहीं रुकना होगा। घांघरिया में आपको बहुत सारे होटल और टेंट्स भी रहने के लिए मिल जाएंगे।

उत्तराखंड की फ्लावर वैली

फिर आप अगले दिन सुबह 7:00 बजे के बाद फ्लावर वैली के लिए निकल सकते हैं। पुलना से घांघरिया का रास्ता जितना खूबसूरत है, घांघरिया से फ्लावर वैली का रास्ता उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत हो जाता है। जब आप घांघरिया से निकलेंगे तो आपको बहुत ही जल्दी ग्लेशियर दिखने शुरू हो जाएंगे। जैसे-जैसे आप फूलों की घाटी की ओर बढ़ेंगे, आपको रास्ते में कई सारे झरने और देवदार के पेड़ देखने को मिलेंगे। देवदार पहाड़ी इलाकों में मिलने वाला एक ऐसा पेड़ है जिसके छाल से पुराने जमाने में भोजपत्र बनाए जाते थे।

जब आप इस वैली तक पहुंचेंगे तो आपको यहां लगभग 500 से भी ज्यादा प्रकार की पौधों और जड़ी बूटियों की प्रजातियाँ देखने को मिलेंगे।
उनके साथ-साथ यहां कई तरह की तितलियां और अलग-अलग तरह के इंसेक्ट्स भी देखने को मिलेंगे।
इस वैली के लिए ट्रैकिंग सिर्फ 4 महीने के लिए हीं खुली रहती है। आप सिर्फ मानसून के समय में ही यहां जा सकते हैं।
इससे जुड़ी एक और खास बात यह है कि यहां हर सप्ताह आपको अलग रंग के फूल खिले हुए दिखेंगे कभी यह वैली बिल्कुल गुलाबी रंगों के फूलों से सजी होती है तो कभी यहां हर तरफ पीले या फिर नीले रंग के फूल देखने को मिलते हैं।
इस वाली से आपको हिमालय के ग्लेशियर बहुत ही आसानी से दिख जाएंगे।
जब इस वैली में कोहरा छा जाता है तब यह वैली परियों की कहानी से भी ज्यादा खूबसूरत हो जाती है।

वैसे तो यहां बहुत सारे विजिटर्स घूमने आते रहते हैं। लेकिन अगर आप शांति से यहां घूमना चाहते हैं तो आप ऐसे समय का चयन करें जब बद्रीनाथ के लिए ट्रैकिंग बंद रहती है। क्योंकि यहां आने वाले अधिकतर विजिटर्स बद्रीनाथ के पर्यटक हीं होते हैं। ऐसे में जब बद्रीनाथ की ट्रैकिंग बंद हो जाती है तो यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या भी कम जाती है

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