BEST Places to Visit in Kurukshetra
Kurukshetra: नवंबर के महीने में गीता जयंती उत्सव का लुत्फ़ उठाते हुए घूमिए कुरुक्षेत्र की ये खास जगह
Five Colors Of Travel
अधिकांश भारत में सर्दियों की शुरुआत नवंबर महीने से होती है। यह महीना देश भर में फेस्टिवल सीजन का महीना भी होता है। यात्रा के लिहाज से देश भर में मौसम और उत्सव नवंबर को आदर्श बनाते हैं, खासकर उन जगहों पर जहां विशेष पर्व, उत्सव और त्यौहार होते हैं, आप सच में उन रंगों, प्रेम और आनंद से भर जाते हैं। ऐसी ही एक जगह है जहाँ आस्था और श्रद्धा दोनों ही आपको बेशुमार मिलेगी, जी हाँ, हम बात कर रहे हैं पावन धरती कुरुक्षेत्र की। जहाँ नवंबर महीने में धूमधाम से अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती उत्सव मनाया जाता है।
तो आइये इस ऐतिहासिक शहर की कुछ खूबसूरत जगहों का अवलोकन करते हैं, शायद आपका मन कर जाए वहां जाने का। हम इस ब्लॉग में आपको कुरुक्षेत्र की कुछ बेहद खास जगह के बारे में बता रहे हैं। कुरुक्षेत्र जा रहे हैं तो इन जगहों पर घूमना मत भूलना ।
ब्रह्म सरोवर का हमने विस्तारपूर्वक वर्णन पिछले ब्लॉग में किया था। नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके आप इसे पढ़ सकते हैं।

ब्रह्मसरोवर घूमने के बाद स्टेशन की ओर जब आप जाते हैं तो रास्ते में आपको छठी पातशाही गुरुद्वारा, सन्नहित सरोवर, श्री कृष्ण संग्रहालय, पैनोरमा विज्ञान केंद्र, यह सभी स्थान लगभग कुछ ही कदम की दूरी पर आपको मिल जाएंगे।
सन्नहित सरोवर
ब्रह्मसरोवर से 500 मीटर की दूरी पर सन्नहित सरोवर स्थित है। मात्र 5 मिनट पैदल चलने पर आसानी से सन्नहित सरोवर पहुंच जायेंगे। हालांकि ब्रह्मसरोवर और इस सरोवर में फर्क सिर्फ विशालता का है।

जहां ब्रह्मसरोवर विशालता के लिए जाना जाता है। वही सन्नहित सरोवर अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता है। सरोवर के मुख्य द्वार पर सामने की तरफ आपको छठी पातशाही गुरुद्वारा भी दिख जाएगा।

हमारे प्राचीन ग्रंथों में इस सरोवर का अपना महत्वपूर्ण स्थान है। सरोवर की गणना कुरुक्षेत्र के सबसे प्राचीन सरोवरों में की जाती है। इस सरोवर को ब्रह्मा, विष्णु तथा शिव का निवास स्थान भी कहा गया है। श्रीमद भगवत पुराण के अनुसार पूर्ण सूर्य ग्रहण के दिन श्री कृष्ण अपने सगे संबंधियों के साथ इस सरोवर में स्नान करने आए थे। साथ ही महाभारत के युद्ध के बाद पांडव यहीं पर पिंडदान करने के लिए आए थे। सरोवर के तट पर सूर्य नारायण, लक्ष्मी नारायण, धुर्व नारायण के मंदिर स्थित हैं। सिख गुरु भी अपने समय पर यहां स्नान करने आए थे।

अमावस्या के दिन और सूर्य ग्रहण के दिन यहां पर हजारों की संख्या में लोग स्नान करने के लिए आते हैं।

छठी पातशाही गुरुद्वारा


सन्नहित सरोवर के ठीक सामने छठी पातशाही गुरुद्वारा दिखाई देता है। सरोवर के मुख्य द्वार से 10 कदम की दूरी पर यह गुरुद्वारा स्थित है। सिख धर्म के अनुसार सिखों के पहले गुरु श्री गुरु नानक देव जी अमावस वाले दिन कुरुक्षेत्र पधारे थे और सन्नहित सरोवर के सामने डेरा लगाया था। इस दौरान गुरु नानक देव जी ने हिंदुओं के प्रसिद्ध नियम जिसमे सूर्य ग्रहण के समय आग नहीं जलाने का नियम होता है, उस नियम को तोड़ते हुए गुरु का लंगर चालू किया। यहां पर सिखों के लगभग अधिकतर गुरु समय-समय पर आते जाते रहे हैं। गुरु श्री हरगोबिंद सिंह जी यहां पर दो बार पधारे थे। Kurukshetra

गुरुद्वारे के अंदर मुंह हाथ धोने के बाद सर पर कपड़ा बांधे प्रवेश किया, आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि किसी भी गुरुद्वारे में बिना सर पर कपड़ा बांधे प्रवेश की इजाजत नहीं मिलती है। सबसे पहले नजर सामने सरोवर पर पड़ी, सरोवर बिलकुल साफ सुथरा था, आसपास किसी भी तरह की गंदगी नहीं थी। फिलहाल गुरुद्वारे का मरम्मत का कार्य चल रहा है, मगर दर्शन करने के लिए कोई मनाही नहीं।
श्री कृष्ण संग्रहालय और पैनोरमा विज्ञान केंद्र

गुरुद्वारे से निकलने के मात्र कुछ कदम की दूरी पर ही आपको पैनोरमा विज्ञान केंद्र और श्री कृष्ण संग्रहालय दिख जाएगा। आप पैदल ही वहां पर आसानी से पहुंच सकते हैं। कुरुक्षेत्र में पैनोरमा और विज्ञान केंद्र की एक सुंदर बेलनाकार इमारत है,


कुरुक्षेत्र पैनोरमा और विज्ञान केंद्र दोनों में ही ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल पर बेलनाकार दीवारों के साथ दो अलग-अलग प्रकार के एक्ज़ीबिशन देखने को मिलेंगी। पैनोरमा में बहुत सी वैज्ञानिक वस्तुओं को भी प्रदर्शित किया गया है। ग्राउंड फ्लोर पर लगी एक्ज़ीबिशन में परमाणु संरचना, ज्यामिति, खगोल विज्ञान और सर्जरी की प्राचीन भारतीय अवधारणा पर अंकगणितीय नियम, काम और इंटरैक्टिव शामिल हैं। यहाँ आपको अधिकतर युवा खासकर स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी दिखाई देंगे। बाकि यहाँ सभी आयु वर्ग के लोग आते हैं।





पैनोरमा के साथ ही एक और सुंदर इमारत श्री कृष्ण संग्रहालय स्थित है, यहाँ प्रवेश करते ही आपको अपने सुरुचिपूर्ण वास्तुकला और वातावरण के साथ, केंद्र का मुख्य आकर्षण कुरुक्षेत्र के महाकाव्य युद्ध का सजीव चित्रण दिखाई देगा। यहाँ आपको पूरी महाभारत एक ही जगह दिखाई देगी। जिसका साउंड सच में अद्भुत है और सच में पांडवों और कौरवों के बीच महाभारत का टकराव उनकी आंखों के सामने जीवित हो जाता है।
Research by Pravesh Chauhan
Edited by Pardeep Kumar
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