Bazar Maharashtra Travel

क्रॉफर्ड मार्केट- जहाँ मुंबई शहर की रफ्तार कुछ पलों के लिए थम जाती है

मुंबई सपनों का नगरी और भारत की आर्थिक राजधानी है। यह न केवल अपनी गगनचुंबी इमारतों, समुद्री तटों और बॉलीवुड के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ के ऐतिहासिक बाजार, इस शहर की खूबसूरती को और भी निखारते हैं। ऐसी ही मुंबई में एक बेहद प्रतिष्ठित, और ऐतिहासिक जगह है क्रॉफर्ड मार्केट। क्रॉफर्ड मार्केट मुंबई के उन उदाहरणों में से एक है, जो न केवल शहर की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को दिखाता है, साथ ही, इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को भी स्पष्ट करता है। दरअसल, ये बाजार मुंबई के दक्षिणी हिस्से में लगता है, जो छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से कुछ ही दूरी पर स्थित है।

क्रॉफर्ड मार्केट के इतिहास की बात की जाए तो इस मार्केट का इतिहास 19 वीं सदी से शुरू माना जाता है। इसका निर्माण सन् 1869 में हुआ था और इसे आधिकारिक रूप से 1871 में खोला गया था। हालांकि इस बाजार का नाम ब्रिटिश कालीन बॉम्बे के तत्कालीन नगरपालिका आयुक्त अर्थर क्रॉफर्ड के नाम पर पड़ा। मेन्युफेक्चरिंग की दृष्टि से यह जगह बेहद खास है।

इस बाजार के निर्माण में ब्रिटिश गॉथिक शैली का प्रयोग किया गया, जिसके साथ ही भारतीय स्थापत्य कला का भी सहयोग लिया गया है। बाजार की इस इमारत के लिए पत्थर राजस्थान से लाए गए थे, जैसा की अन्य किले और भवन बनाने में इस पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। इसकी सजावट में लाल पत्थर और कांच का सुंदर उपयोग मनमोहक है। इस बाजार की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसके छत को फ्रांसिस न्यूटन सॉली नामक ब्रिटिश वास्तुकार ने डिज़ाइन किया था। इसकी अंदर की दीवारों पर जॉन लॉकवुड किपलिंग द्वारा बनाई गई, सुंदर पशुओं की चित्रकारी आज भी दर्शकों के मन को मोहने का काम करती है।

आज भी मुंबई की जनता के लिए रोजमर्रा का जीवन एक अहम हिस्सा है। यह बाजार एक प्रकार का हाट जैसा है, जहाँ पर सब्जियाँ, फल-फूल, किराना मसाले, सौंदर्य का सामान, घरेलू साज-सज्जा का सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, और यहां तक कि पालतू जानवर भी खरीदे-बेचे जाते हैं। सूरज उगने के साथ ही इस बाजार की गलियों में चहल-पहल और शोर-गुल शुरू हो जाता है। आवाज़ें, मोल-भाव, ट्रॉलियों की खड़खड़ाहट और लोगों की भागदौड़। यह सब देखकर बड़ा ही आनंद आता है, एक बार इस बाजार में घूमने का समय आपको जरूर निकालना चाहिए। इस बाजार को विशेष तौर पर ताजे फलों, सूखे मेवों और विदेशी खाद्य वस्तुओं के लिए जाना पहचाना जाता है।

क्रॉफर्ड मार्केट

इतिहास के कई पन्नों को पार करते हुए आज यह बाजार ब्रिटिश भारत और स्वतंत्र भारत तक का साक्षी है। स्वतंत्रता संग्राम के समय इस बाजार के आस-पास की गलियों में अनेक सभाएँ और बैठकें आयोजित होती थीं, जिनमें चर्चाओं और खासकर राजनैतिक चर्चा को जगह दी जाती थी। क्रॉफर्ड मार्केट उस समय से ही न केवल व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र रहा बल्कि राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों का भी केंद्र बिन्दु के रूप में काम करता रहा है। यह बाजार भारतीय मिडिल क्लास और उद्योगपतियों के लिए एक केंद्र सा बन चुका था। जहाँ से उन्होंने अपने कारोबार की शुरुआत की और एक नई आर्थिक शक्ति का निर्माण किया।

‎समय के साथ बाजार का स्वरूप बदला रहा है। जहां पहले यह बाजार कृषि और पालतू पशुओं के बेचने खरीदने के लिए मशहूर था। वहीं अब इसमें मॉडर्न जमाने घरेलू सामान, खिलौने, स्टेशनरी, किचन का सामान और टेक्सटाइल से संबंधित बस्तुएं भी बिकती हैं। आज के समय में जहां हम देखते हैं, मॉल संस्कृति तेजी से फैल रही है, पर क्रॉफर्ड मार्केट एक ऐसी जीवंत स्मारक है, जो पारंपरिक खरीददारी की शैली को आज भी बनाए हुए है। इसकी गलियों में विचरण कर एक अलग ही अनुभव मिलता है। जैसे आप इतिहास और वर्तमान को एक साथ महसूस कर रहे हों। यहाँ की गलियों में लगीं दुकाने और दुकानदार पीढ़ियों से अपना योगदान इस बाजार के लिए दे रहे हैं और ग्राहक भी पीढ़ियों से वहीं आ रहे हैं। लगता है अब वे इस बाजार के आदती हो चुके हैं। अब यहाँ दुकानदारों और ग्राहकों का संबंध न केवल व्यापारिक है बल्कि भावनात्मक रूप से मजबूत हो चुका है।

क्रॉफर्ड मार्केट

‎इस बाजार का एक दिलचस्प पहलू यह है कि इस बाजार की कुछ दुकानें सौ से अधिक वर्ष पुरानी हैं। इसके कुछ उदाहरण इस बात से मिलते हैं की आज भी कुछ दुकानों पर अंग्रेजी नाम दिखाई देते हैं। जो उनके औपनिवेशिक इतिहास की झलक की पहचान छिपाए हुए हैं। इन्हीं गलियों में आपको मिश्रित खुशबू का एहसास होता है। क्योंकि बाजार में फूलों की, मसालों की, ताजे फलों की और कुछ पुराने पालतू जानवरों की दुकानों की भी हैं। विशेष तौर पर दीवाली, ईद, होली और क्रिसमस के समय इस बाजार की रौनक और अधिक बढ़ जाती है। लोगों की भीड़, सजे हुए स्टॉल्स और रोशनी से जगमगाती गलियाँ, ये सब मिलकर एक अलग ही द्रश्य बना देती हैं, मानो कोई त्योहार का समय हो।

‎क्रॉफर्ड मार्केट, स्थानीय व्यापारियों के लिए तो है ही, ग्राहकों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस बाजार की रोचकता इस बात से और बड़ जाती है की कई विदेशी पर्यटक भी इस ऐतिहासिक बाजार को देखने आते हैं, और यहाँ की संस्कृति और विविधता को देखकर अचंभित रह जाते हैं। कई फोटोग्राफर और इतिहास प्रेमी इसे अपने केमरे लेंस और लेखनी में कैद करते हैं साजोते हैं। भारत के सबसे बड़े और पुराने थोक बाजारों में से एक होने के नाते, यह मुंबई की व्यापारिक शक्ति का जीता-जागता उदाहरण है। हमें अपनी इस ऐतिहासिक पहचान को देखभाल कर बचाए रखने की जरूरत है। हालांकि समय के साथ-साथ बाजार को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा है। जैसे बढ़ती भीड़, ट्रैफिक जाम, सफाई की समस्या और अच्छे ढांचे की कमी, इसकी प्रमुख समस्याओं में शामिल हैं।

क्रॉफर्ड मार्केट

बावजूद इसके बीएमसी समय-समय पर इस बाजार के रिडिजाइन और विकास के प्रयास करती रही है। जिससे आज यह बाजार अपने पुराने अंदाज में लोगों को आकर्षित करता है। कुछ समय पहले इसका आंशिक रूप से पुनिर्माण किया गया था, जिसमें इसके ऐतिहासिक स्वरूप को ध्यान में रखते हुए, आधुनिक सुविधाओं को जोड़ा गया। इसकी खासियत यह है की कुछ भागों में एयर-कूलिंग और वेंटिलेशन जैसी सुविधाएँ भी शुरू की गई हैं ताकि यहाँ घूमने वाले या ग्राहको को भीड़ में किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े

क्रॉफर्ड मार्केट का सामाजिक पहलू भी अत्यंत दिलचस्प और रोमांचक है। यहाँ न सिर्फ एक-दूसरे को जानने वाले व्यापारी और ग्राहक आते हैं बल्कि अलग-अलग भाषाएँ, जातियाँ और संस्कृतियाँ भी बाजार में एक साथ आकर मिलती हैं। यह बाजार अपने आप में भारत की विविधता और एकता की पहचान है। बाजार की भीड़ गुजराती, मराठी, उत्तर भारतीय मजदूर, दक्षिण भारतीय दुकानदार और विदेशी पर्यटक से सराबोर होती है।

बदलते समय और आधुनिक होते बाज़ार मॉडल के बावजूद क्रॉफर्ड मार्केट आज भी अपनी गरिमा और ऐतिहासिक पहचान को बनाए हुए है। यह बाजार केवल एक खरीदारी का केंद्र नहीं है बल्कि समय की एक जीवंत डायरी है। जिसकी पहचान और खूबसूरती हर एक भारतीय के मन में विद्यमान है। इसमें न सिर्फ मुंबई की आत्मा बसती है, बल्कि भारत की संस्कृति का पुख्ता नमूना है यह बाजार। बाजार का हर कोना, हर गली, और हर दुकान कोई न कोई कहानी समेटे हुए है। यह बाजार उस पुरानी मुंबई की याद समेटे हुए है, जहाँ लोग रिश्तों को व्यापार से ज्यादा अहमियत देते थे। जहाँ ग्राहक और दुकानदार के बीच भावनात्मक संबंध होते थे, और जहाँ खरीदारी एक अनुभव होती थी, केवल व्यापार नहीं।

क्रॉफर्ड मार्केट, मुंबई के दक्षिणी हिस्से में स्थित है और यहाँ पहुँचना बेहद आसान है। कोई भी आसानी से यहाँ पहुँच सकता है यदि आप लोकल ट्रेन से यात्रा कर रहे हैं, तब छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस या मस्जिद बंदर स्टेशन पर उतरना सबसे सबसे अच्छा होगा, क्योंकि दोनों ही स्टेशन से क्रॉफर्ड मार्केट पैदल दूरी पर है। मुंबई के किसी भी कोने से बस, टैक्सी या ऑटो रिक्शा के जरिए भी आप आसानी से यहाँ पहुँच सकते हैं। बाजार के आस-पास कई प्रमुख सड़कें और बस स्टॉप हैं, जिससे परिवहन की सुविधा बनी रहती है। यदि आप खुद के वाहन से जा रहे हैं, तब भी आपको यहाँ पहुँचने में आसानी होगी। लेकिन इससे आपको पार्किंग के समस्या उठानी पड़ सकती है

क्रॉफर्ड मार्केट

अंततः कहा जा सकता है कि क्रॉफर्ड मार्केट आज भी मुंबई की भीड़भाड़ और शोर-शराबे के बीच एक ऐसा स्थान है जहाँ परंपरा, व्यापार, कला और इतिहास का संगम होता है। विशेष बात यह है की बाजार न केवल मुंबई वालों के दिल के करीब है, साथ में पूरे देश की सांस्कृतिक पहचान और व्यापारिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। आने वाले समय में मॉल्स और ऑनलाइन शॉपिंग कितनी भी अहम हो जाए, परंतु क्रॉफर्ड मार्केट जैसी ऐतिहासिक जगहों की अहमियत कभी कम नहीं आंकी जा सकती। यह एक ऐसा बाजार है, जो न केवल सामान बेचता है बल्कि भावनात्मक यादें और इतिहास भी संजोता है।

admin

About Author

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

Culture Himachal Pradesh Travel

Chail- Amazing places to visit in Chail

चंडीगढ़ से महज 110 किमी की दूरी पर है खूबसूरत चैल हिल स्टेशन by Pardeep Kumar मैं प्रदीप कुमार फाइव
Bazar Culture Delhi Food

Jama Masjid Best Non Veg Street Food Places

Jama Masjid Street Food: जामा मस्जिद के सामने बरसों पुरानी गली के इन प्रसिद्ध लज़ीज व्यंजनों का जायका कभी नहीं