Culture Destination Lifestyle Travel Uttar Pradesh

प्रहलाद के साथ मथुरा वृंदावन से भी जुड़े हैं होली के तार

जैसे हीं फाल्गुन मास की शुरुआत होती है हमें नुक्कड़ों और चौराहों पर यह गाना अक्सर सुनने को मिल जाता है। इस गाने के बोल से हीं आपको पता चल गया होगा कि आज हम होली (Holi) के बारे में आपको बताने वाले हैं। होली पूरे भारतवर्ष में मनाया जाने वाला एक ऐसा त्यौहार (Festivals) जो न सिर्फ उत्साह और उमंग का प्रतीक है, बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत को भी दर्शाता है। जब भी हम होली का नाम सुनते हैं, हमारे जहन में चारों ओर उड़ते रंग-गुलाल (Colors) और साथ में नाचते गाते लोगों का एक काल्पनिक चित्र कौंधता है। ऐसा होना स्वभाविक भी है क्योंकि ये रंग हीं तो होली की पहचान हैं। लेकिन होली के इन रंगों की कहानी बड़ी पुरानी है। अगर हिंदू धर्म ग्रंथों (Hindu scriptures) की माने तो होली की कहानी भगवान विष्णु और उनके भक्त प्रहलाद से जुड़ी हुई है। आज के फाइव कलर्स आफ ट्रैवल (Five colors of travel) के इस ब्लॉग में हम आपको इस कहानी के बारे में पूरे विस्तार से बताएंगे। (why is holi celebrated) साथ हीं साथ हम आपको होली के बारे में कुछ रोचक तथ्यों (Interesting facts about Holi) से भी अवगत करवाएंगे।

जैसे ही मार्च (March) के महीने की शुरुआत होती है बच्चे अपने घर में पिचकारियों की खरीदारी के लिए घर वालों को मानने लगते हैं। हर साल उन्हें नया पिचकारी जो चाहिए होता है! वही घर की महिलाएं होली के दिन कौन से पुए पकवान बनवाएंगी इस बात का प्रबंधन देखने लगती हैं। घर के पुरुष होली में उपयोग में आने वाले सामान जैसे पिचकारी, रंग, गुलाल के साथ-साथ पुए पकवानों (sweets and deserts) के लिए उपयोग में आने वाले राशन के समान लाने की तैयारी में लग जाते हैं। वसंत ऋतु की शुरुआत ही उत्साह (excitement) के साथ होती है। यह मौसम सभी को नवीनता का एक एहसास देता है। इसलिए इस मौसम में लोगों में उत्साह अपने चरम पर होता है। जिसके कारण यह त्यौहार और भी ज्यादा जोरों शोरों से मनाया जाता है।

वहीं काशी की होली इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि यहां की होली रंगों की नहीं बल्कि चिता के भस्मों की होती है। आप सभी यह जानते होंगे की काशी महादेव की भूमि है। जो कि स्वयं शमशान वासी भी कहलाते हैं और काशी में ही स्थित है एक ऐसा घाट जो अंतिम संस्कार के लिए जाना जाता है। जहां जाकर लोग मोक्ष को प्राप्त करते हैं । यह घाट है मणिकर्णिका घाट! काशी के इस घाट पर हर साल रंगभरी एकादशी के अगले दिन मसान होली मनाई जाती है, जो यह संदेश देती है कि मृत्यु मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा सत्य है और दुनिया का सबसे पवित्र स्थान शमशान है।

उम्मीद है होली पर यह ब्लॉग आप सभी को पसंद आया होगा और आपको इससे कुछ ना कुछ नई जानकारी अवश्य मिली होगी।

admin

About Author

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

Culture Himachal Pradesh Travel

Chail- Amazing places to visit in Chail

चंडीगढ़ से महज 110 किमी की दूरी पर है खूबसूरत चैल हिल स्टेशन by Pardeep Kumar मैं प्रदीप कुमार फाइव
Culture Destination Lifestyle Uttar Pradesh

Garh Mukteshwar

Garh Mukteshwar – गढ़मुक्तेश्वर: जहाँ कौरवों और पांडवों का पिंडदान हुआ था By Pardeep Kumar नमस्कार, आदाब, सत श्री अकाल